यहाँ पर आप कक्षा VI से X तक की PPT, lesson plan, परीक्षा प्रश्न पत्र आदि डाउनलोड करके आप उनमें अपने अनुसार आवश्यक बदलाव कर सकते हैं|
व्याकरण लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
व्याकरण लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2020

संज्ञा और उसके भेद


संज्ञा
किसी वस्तु, प्राणी, स्थान, भाषा, अवस्था, गुण या दशा के नाम को संज्ञा कहते हैं। संज्ञा शब्द का प्रयोग किसी वस्तु के लिए नहीं, अपितु वस्तु के नाम के लिए होता है।
जैसे - हिमालय,राम,जयपुर,बैल आदि।
संज्ञा के मुख्य रूप से तीन भेद होते है-
1.         व्यक्तिवाचक संज्ञा
2.         जातिवाचक संज्ञा
3.         भाववाचक संज्ञा
1. व्यक्तिवाचक संज्ञा
किसी व्यक्ति विशेष के नाम, स्थान विशेष के नाम और किसी वस्तु विशेष के नाम को व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। जिन शब्दों का प्रयोग किसी एक के लिए हो उन्हें व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे राम(व्यक्ति विशेष),जयपुर(स्थान विशेष),पानी(वस्तु विशेष),
विशेष
जो इस संसार में केवल एक हो उसके लिए प्रयुक्त नाम व्यक्ति वाचक संज्ञा होगा।
जैसे - पृथ्वी, आकाश
कुछ जातिवाचक संज्ञाएं प्रसंग के अनुसार व्यक्ति वाचक संज्ञा मानी जाती है।
जैसे - बोस ने कहा था तुम मुझे खुन दो मैं तुम्हें आजादी दुंगा।
यहां बोस जातिवाचक संज्ञा है लेकिन यहां पर बोस का अर्थ सुभाष चन्द्र बोस से लिया गया है इसलिए यह व्यक्ति वाचक संज्ञा है।
यंत्र के नाम निर्माता कंम्पनी के साथ आये तो व्यक्तिवाचक संज्ञा माने जाते हैं।
जैसे - बजाज पंखा।
जिस वस्तु, व्यक्ति या स्थान विशेष का नाम उसके जन्म के पश्चात रखा जाता है वह व्यक्तिवाचक होता है
जैसे - जब किसी बच्चे का जन्म होता है तो उसका उस समय कोई नाम नहीं होता है जन्म के पश्चात उसका नाम राम, मोहन रखा जाता है जो कि व्यक्ति वाचक है।
2. जातिवाचक संज्ञा
जिस संज्ञा से किसी प्राणी, वस्तु अथवा स्थान के वर्ग या उसकी जाति का ज्ञान हो, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।
जिन शब्दों का प्रयोग समुह के लिए किया जाता है उन्हें जातिवाचक संज्ञा कहते है।
जैसे पर्वत, कुर्सी, गाय, गुलाब, गेंदा।
विशेष
कुछ व्यक्ति वाचक संज्ञाएं जो प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक नाम है। प्रसंग के अनुसार जाति वाचक संज्ञा माने जाते हैं।
जैसे - भारत में आज भी श्रवण कुमार पैदा होते हैं।
3. भाववाचक संज्ञा
किसी भाव, गुण, दशा अथवा अवस्था के नाम को भाववाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे - अमीरी, बुढ़ापा, दुख, अच्छा, प्रसन्नता, क्रोध, सौन्दर्य।
तथ्य
कुछ विद्वान इन भेदों के अलावा दो भेद और मानते है - समुदायवाचक व द्रव्यवाचक। परन्तु ये दोनों ही जातिवाचक संज्ञा के अन्तर्गत आते हैं।

संज्ञा के बारे में प्रारंभिक जानकारी आप नीचे दिए YouTube link लिंक से भी जान सकते हैं|



शनिवार, 15 फ़रवरी 2020

पद विचार -विशेषण



विशेषण
परिभाषा
      संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, संख्या, रंग, आकारप्रकार आदि) बताने वाले शब्दोँ को विशेषण कहते हैँ। जैसेमोटा, पतला, कौन आदि।
उदाहरणार्थ
एक किलो चीनी लाओ।
सफेद गाय कम दूध देती है।
बच्चा होशियार है।
कुछ लोग सो रहे हैँ।
मेरी कक्षा मेँ बीस विद्यार्थी हैँ।
      उपर्युक्त वाक्योँ मेँ एक किलो, सफेद, कम, होशियार, कुछ, बीस क्रमशः चीनी, गाय, दूध, बच्चे, लोग तथा विद्यार्थी की विशेषता बता रहे हैँ, अतः ये सभी विशेषण हैँ।

अधिक जानकारी के लिए फाइल डाउनलोड करें |
धन्यवाद|
🔻
विशेषण pdf 

पद विचार - सर्वनाम


सर्वनाम
परिभाषा
  
    संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्दोँ को सर्वनाम कहते हैँ।
      सर्वनाम का अभिधार्थ हैसबका नाम। जो सबके नाम के स्थान पर आये, वे सर्वनाम कहलाते हैं। जैसेमैँ, तुम, आप, यह, वह, हम, उसका, उसकी, वे, क्या, कुछ, कौन आदि।
      वाक्य मेँ संज्ञा की पुनरुक्ति को दूर करने के लिए ही सर्वनाम का प्रयोग किया जाता है। सर्वनाम भाषा को सहज, सरल, सुन्दर एवं संक्षिप्त बनाते हैँ। सर्वनाम के अभाव मेँ भाषा अटपटी लगती है।
अधिक जानकारी के लिए फाइल डाउनलोड करें |
धन्यवाद|

🔻
सर्वनाम pdf 

पद–विचार [संज्ञा]


पदविचार
पद की परिभाषा
      सार्थक वर्ण या वर्णोँ के समूह को शब्द कहा जाता है। शब्द साभिप्राय होते हैँ। जब कोई सार्थक शब्द वाक्य मेँ प्रयुक्त होता है तब उसे पदकहते हैँ। व्याकरण के नियमोँ के अनुसार विभक्ति, वचन, लिँग, काल आदि की योग्यता रखने वाला वर्णोँ का समूह पदकहलाता है। जैसेराम विद्यालय जायेगा। यह वाक्य राम’, ‘विद्यालयऔर जायेगातीन पदोँ से बना है।
पदभेद :
      हिन्दी में पद के पाँच भेद या प्रकार माने गये हैं
(1) संज्ञा (2) सर्वनाम (3) क्रिया (4) विशेषण (5) अव्यय।
 संज्ञा
      ‘संज्ञा’ (सम्+ज्ञा) शब्द का अर्थ है ठीक ज्ञान कराने वाला। अतः वह शब्द जो किसी स्थान, वस्तु, प्राणी, व्यक्ति, गुण, भाव आदि के नाम का ज्ञान कराता है, संज्ञा कहलाता है।
अधिक जानकारी के लिए फाइल डाउनलोड करें |

धन्यवाद|
🔻
संज्ञा pdf

शब्द–शक्तियाँ


शब्दशक्तियाँ
शब्दशक्ति
      बुद्धि का वह व्यापार या क्रिया जिसके द्वारा किसी शब्द का निश्चयार्थक ज्ञान होता है, अर्थात् अमुक शब्द का निश्चित अर्थ यह हैइस तरह का स्थायी ज्ञान जिस शब्दव्यापार से मानस मेँ संस्कार रूप मेँ समाविष्ट होता है, उसे शब्दशक्ति कहते हैँ।
      वाक्य मेँ सदा सार्थक शब्द का प्रयोग होता है। वाक्य मेँ प्रयुक्त प्रत्येक शब्द का प्रयोग के अनुसार अर्थ बतलाने वाली वृत्ति को उसकी शक्ति अर्थात् शब्दशक्ति या शब्दवृत्ति कहते हैँ।
अधिक जानकारी के लिए फाइल डाउनलोड करें |

धन्यवाद|
🔻
शब्द शक्ति pdf

शब्द–विचार


शब्दविचार
शब्द:
      प्रयोगयोग्य, एकार्थबोधक तथा परस्पर अन्वित वर्णों के समूह को शब्द कहते हैं। दूसरे शब्दों में एक या अनेक वर्णों के मेल से निर्मित स्वतंत्र एवं सार्थक ध्वनि ही शब्द कहलाती है। जैसे एक वर्ण से निर्मित शब्दन (नहीं) व (और), अनेक वर्णों से निर्मित शब्दकुत्ता, शेर, कमल, नयन, प्रासाद, सर्वव्यापी, परमात्मा, बालक, कागज, कलम आदि।
      मनुष्य सामाजिक प्राणी है तथा वह समाज में भाषा के माध्यम से परस्पर विचारविनिमय करता है। इस प्रक्रिया में जो वाक्य प्रयुक्त हैं, उनमें सार्थक शब्दों का प्रयोग करता है। शब्द किसी भाषा के प्राण हैं। बिना शब्दों के भाषा की कल्पना करना असंभव है। शब्द भाषा की एक स्वतंत्र एवं सार्थक इकाई है, जो एक निश्चित अर्थ का बोध कराती है।

अधिक जानकारी के लिए फाइल डाउनलोड करें |

धन्यवाद|
🔻

वर्ण–विचार


वर्णविचार

      हिन्दी भाषा में वर्ण वह मूल ध्वनि है, जिसका विभाजन नहीँ हो सकता। भाषा की ध्वनियों को लिखने हेतु उनके लिए कुछ लिपिचिह्न हैं। ध्वनियों के इन्हीँ लिपिचिह्नों को वर्णकहा जाता है। वर्ण भाषिक ध्वनियों के लिखित रूप होते हैं। हिन्दी में इन्हीँ वर्णों को अक्षरभी कहते हैँ। इस प्रकार ध्वनियों का सम्बंध जहाँ भाषा के उच्चारण पक्ष से होता है, वहीँ वर्णों का सम्बन्ध लेखन पक्ष से। हिन्दी भाषा मेँ सम्पूर्ण वर्णों के समूह को वर्णमालाकहते हैँ। हिन्दी वर्णमाला मे 44 वर्ण हैं जिसमें 11 स्वर एवं 33 व्यंजन हैं।
स्वर :स्वर वे वर्ण हैं जिनका उच्चारण करते समय वायु बिना किसी अवरोध या रूकावट के मुख से बाहर निकलती है। स्वर 11 हैं, , , , , , , , , , औ।
       यद्यपि को लिखित रूप में स्वर माना जाता है किन्तु आजकल हिन्दी में इसका उच्चारण रिके समान होता है। इसलिए को स्वरों की श्रेणी में सम्मिलित नहीँ किया गया है।
       
अधिक जानकारी के लिए फाइल डाउनलोड करें |

धन्यवाद|
🔻

भाषा, बोली और व्याकरण


भाषा, बोली और व्याकरण
भाषा
      भाषा मूलतः ध्वनिसंकेतों की एक व्यवस्था है, यह मानव मुख से निकली अभिव्यक्ति है, यह विचारों के आदानप्रदान का एक सामाजिक साधन है और इसके शब्दों के अर्थ प्रायः रूढ़ होते हैँ। भाषा अभिव्यक्ति का एक ऐसा समर्थ साधन है जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचारों को दूसरों पर प्रकट कर सकता है और दूसरों के विचार जान सकता है। अतः हम कह सकते हैँ कि भावों और विचारों की अभिव्यक्ति के लिए रूढ़ अर्थों मेँ प्रयुक्त ध्वनि संकेतों की व्यवस्था ही भाषा है।
      प्रत्येक देश की अपनी एक भाषा होती है। हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी है। संसार में अनेक भाषाएँ हैं। जैसे- हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी, बँगला, गुजराती, पंजाबी, उर्दू, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, फ्रैंच, चीनी, जर्मन इत्यादि।

अधिक जानकारी के लिए फाइल डाउनलोड करें |

धन्यवाद|
🔻
भाषा बोली pdf