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शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

📖 कक्षा 7 हिंदी – 01. माँ, कह एक कहानी

 

📘 पाठ — माँ, कह एक कहानी

कवि — मैथिलीशरण गुप्त

📝 सरल सारांश

यह कविता माँ यशोधरा और उनके पुत्र राहुल के संवाद के रूप में है। राहुल अपनी माँ से कहानी सुनाने की जिद करता है। यशोधरा उसे उसके पिता सिद्धार्थ की कहानी सुनाती हैं। सिद्धार्थ प्रातःकाल एक सुंदर उपवन में घूमने जाते थे। वहाँ रंग-बिरंगे फूल, ओस की चमक, मंद हवा और लहराता हुआ पानी बहुत सुंदर वातावरण बनाते थे। तभी एक हंस शिकारी के तेज बाण से घायल होकर नीचे गिरता है।

सिद्धार्थ घायल हंस को उठाकर उसकी रक्षा करते हैं। कुछ समय बाद शिकारी वहाँ आता है और हंस को अपना बताकर माँगता है, लेकिन सिद्धार्थ उसे देने से मना कर देते हैं। इस कारण दोनों के बीच विवाद हो जाता है और मामला न्यायालय तक पहुँच जाता है। यशोधरा राहुल से पूछती हैं कि न्याय किसका पक्ष लेगा—रक्षक का या भक्षक का? राहुल उत्तर देता है कि यदि कोई निर्दोष को मारता है तो दूसरे व्यक्ति को उसकी रक्षा करनी चाहिए। इसलिए न्याय दया और रक्षक का पक्ष लेगा।

इस कहानी के माध्यम से यशोधरा राहुल में भी अपने पिता सिद्धार्थ के समान दया, करुणा, प्रेम और न्याय की भावना विकसित करना चाहती हैं।

⭐ मुख्य सीख

  • निर्दोष और कमजोर की रक्षा करनी चाहिए।
  • रक्षक, भक्षक से श्रेष्ठ होता है।
  • न्याय हमेशा दया और करुणा का साथ देता है।
  • हमें जीव-जंतुओं के प्रति भी दयालु होना चाहिए।
  • माता-पिता बच्चों में अच्छे संस्कार कहानियों के माध्यम से विकसित कर सकते हैं।

🎯 परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु

प्रश्न                                 उत्तर
कवि का नाममैथिलीशरण गुप्त
कहानी कौन सुनाता है?यशोधरा
कहानी सुनने की जिद किसने की?राहुल ने
यशोधरा किसकी कहानी सुनाती हैं?सिद्धार्थ की
हंस को किसने घायल किया?शिकारी ने
हंस की रक्षा किसने की?सिद्धार्थ ने
विवाद कहाँ पहुँचा?न्यायालय में
न्याय किसका पक्ष लेता है?रक्षक और दयावान व्यक्ति का
कविता का मुख्य संदेशदया, करुणा, प्रेम और न्याय

📖 कक्षा 7 हिंदी – 02. तीन बुद्धिमान

 

📘 पाठ — तीन बुद्धिमान

कहानी — तीन बुद्धिमान भाई

📝 सरल सारांश

‘तीन बुद्धिमान’ एक शिक्षाप्रद कहानी है, जिसमें तीन गरीब भाइयों की पैनी दृष्टि, तीव्र बुद्धि और तर्कशक्ति का परिचय मिलता है। उनके पिता ने उन्हें सिखाया था कि धन-संपत्ति से अधिक महत्वपूर्ण ज्ञान और बुद्धि है। पिता की मृत्यु के बाद तीनों भाई दुनिया घूमने के लिए निकल पड़े। वे कठिन रास्तों, घाटियों और पहाड़ों को पार करते हुए चालीस दिनों तक चलते रहे। उनके पास भोजन समाप्त हो गया और वे बहुत थक गए, लेकिन उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी।

नगर के पास पहुँचने पर तीनों भाइयों ने बिना ऊँट को देखे उसके बारे में कई बातें बता दीं। बड़े भाई ने पैरों के निशान देखकर बताया कि वहाँ से एक बड़ा ऊँट गया है। मझले भाई ने सड़क के किनारे घास देखकर अनुमान लगाया कि ऊँट एक आँख से नहीं देख सकता। सबसे छोटे भाई ने पैरों और बैठने के निशानों से बताया कि ऊँट पर एक महिला और एक बच्चा सवार थे।

कुछ समय बाद ऊँट का मालिक वहाँ आया। भाइयों की बातें सुनकर उसे लगा कि उन्होंने ही उसका ऊँट चुराया है। वह उन्हें राजा के पास ले गया और उन पर चोरी का आरोप लगाया। भाइयों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऊँट को देखा तक नहीं, बल्कि अपनी आँखों और बुद्धि से उसके बारे में अनुमान लगाया था।

राजा ने उनकी बुद्धिमानी की परीक्षा लेने के लिए एक बंद पेटी मँगवाई। भाइयों ने पेटी को ध्यान से देखकर बताया कि उसमें एक छोटी गोल वस्तु, अनार और वह भी कच्चा अनार है। पेटी खोलने पर उनका अनुमान बिल्कुल सही निकला। राजा ने उनसे पूछा कि उन्होंने यह सब कैसे जाना। भाइयों ने बताया कि उन्होंने पेटी के वजन, उसमें वस्तु के लुढ़कने की आवाज, पेटी के उद्यान की ओर से आने और बाहर लगे अनार के पेड़ों को देखकर निष्कर्ष निकाला था।

अंत में राजा उनकी असाधारण पैनी दृष्टि और तीक्ष्ण बुद्धि से बहुत प्रभावित हुआ। उसने कहा कि वे धन-दौलत से भले ही अमीर नहीं हैं, लेकिन उनके पास बुद्धि का बहुत बड़ा कोष है और उन्हें अपने दरबार में रख लिया।

⭐ मुख्य सीख

  • बुद्धि सबसे बड़ा धन है।
  • हर वस्तु और परिस्थिति को ध्यान से देखना चाहिए।
  • केवल देखकर ही नहीं, बल्कि सोचकर और तर्क लगाकर निष्कर्ष निकालना चाहिए।
  • पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि कठिन परिस्थितियों में बहुत उपयोगी होती है।
  • धन-संपत्ति से अधिक मूल्यवान ज्ञान, विवेक और समझदारी है।

🎯 परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु

बिंदुउत्तर
कहानी का नामतीन बुद्धिमान
मुख्य पात्रतीन बुद्धिमान भाई, घुड़सवार और राजा
भाइयों के पास सबसे बड़ा धनपैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि
वे यात्रा पर क्यों निकले?दुनिया देखने और आवश्यकता पड़ने पर काम करके जीवन चलाने के लिए
वे कितने दिन चलते रहे?चालीस दिन
बड़े भाई ने क्या पहचाना?बड़ा ऊँट
मझले भाई ने क्या पहचाना?ऊँट एक आँख से नहीं देख सकता था
छोटे भाई ने क्या पहचाना?ऊँट पर महिला और बच्चा सवार थे
पेटी में क्या था?कच्चा अनार
बड़े भाई ने क्या देखा/सुना?पेटी हल्की थी और उसमें गोल वस्तु के लुढ़कने की आवाज आई
मझले भाई ने अनार का अनुमान कैसे लगाया?पेटी उद्यान की ओर से आई थी और वहाँ अनार के पेड़ थे
छोटे भाई ने अनार को कच्चा कैसे जाना?उद्यान के सभी अनार कच्चे थे
राजा ने अंत में क्या किया?भाइयों को अपने दरबार में रख लिया
मुख्य संदेशबुद्धि, ज्ञान, निरीक्षण और तर्क मनुष्य की सबसे बड़ी पूँजी हैं।

📌 एक वाक्य में सार

‘तीन बुद्धिमान’ कहानी सिखाती है कि धन-संपत्ति से अधिक मूल्यवान पैनी दृष्टि, बुद्धि, ज्ञान और तर्कशक्ति है, जिनके बल पर व्यक्ति कठिन परिस्थितियों को भी समझदारी से हल कर सकता है।

📖 कक्षा 7 हिंदी – 03. फूल और काँटा

 

📘 पाठ — फूल और काँटा

कवि — अयोध्या सिंह ‘उपाध्याय’

📝 सरल सारांश

‘फूल और काँटा’ कविता में कवि ने फूल और काँटे के उदाहरण के माध्यम से मनुष्य के स्वभाव और कर्मों के महत्त्व को समझाया है। कवि का कहना है कि किसी ऊँचे कुल या प्रतिष्ठित परिवार में जन्म लेना ही महान बनने के लिए पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति की महानता उसके अपने स्वभाव और कर्मों से निर्धारित होती है। फूल और काँटा एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं और एक ही वातावरण में पलते-बढ़ते हैं। दोनों पर चाँदनी, वर्षा और हवा का प्रभाव भी समान होता है। फिर भी दोनों का स्वभाव बिल्कुल अलग होता है। इससे कवि बताते हैं कि समान परिस्थितियाँ मिलने के बावजूद व्यक्ति अपने कर्म और व्यवहार से अलग पहचान बनाता है।

काँटे का स्वभाव हानिकारक होता है। वह किसी की उँगली में चुभता है, सुंदर कपड़े फाड़ देता है तथा तितलियों के पंख और भँवरों के शरीर को घायल कर सकता है। इसलिए काँटा सभी को बुरा लगता है। इसके विपरीत फूल का स्वभाव कोमल और प्रिय होता है। वह तितलियों को अपनी गोद में स्थान देता है, भँवरों को रस प्रदान करता है और अपनी सुगंध तथा सुंदर रंगों से लोगों के मन को प्रसन्न करता है। इसी कारण फूल देवताओं और सज्जनों के सिर की शोभा बनता है।

अंत में कवि कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति में बड़प्पन और अच्छे गुणों की कमी है, तो उसका ऊँचा कुल या प्रतिष्ठित वंश भी उसकी प्रतिष्ठा नहीं बचा सकता। इसलिए हमें अपने स्वभाव, व्यवहार और कर्मों को श्रेष्ठ बनाना चाहिए।

⭐ मुख्य सीख

  • जन्म से नहीं, कर्मों से महानता प्राप्त होती है।
  • ऊँचे कुल में जन्म लेना महान होने की गारंटी नहीं है।
  • व्यक्ति की पहचान उसके स्वभाव और व्यवहार से होती है।
  • हमें दूसरों के लिए उपयोगी, कोमल और सुखद बनना चाहिए।
  • अच्छे कर्म और अच्छे गुण ही सच्चा बड़प्पन हैं।

🎯 परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु

बिंदु                                  उत्तर
कविअयोध्या सिंह ‘उपाध्याय’
रचनाफूल और काँटा
फूल और काँटे की समानताएक ही पौधे पर जन्म, समान चाँदनी, वर्षा और हवा
काँटे का स्वभावहानिकारक और कष्ट देने वाला
फूल का स्वभावकोमल, सुंदर, सुगंधित और प्रिय
फूल किसे प्रसन्न करता है?तितलियों, भँवरों और मनुष्यों को
काँटा क्यों बुरा लगता है?क्योंकि वह चुभता और नुकसान पहुँचाता है
फूल क्यों अच्छा लगता है?क्योंकि वह सुगंध और सुंदरता से मन प्रसन्न करता है
‘कुल’ का अर्थवंश या परिवार
‘बड़प्पन’ का आधारअच्छे गुण, स्वभाव और कर्म
कविता का मुख्य संदेशमहानता जन्म या कुल से नहीं, बल्कि कर्म और स्वभाव से मिलती है।

📌 एक वाक्य में सार

फूल और काँटा समान वातावरण में पले होने पर भी अपने अलग-अलग स्वभाव के कारण अलग पहचान रखते हैं; इसी प्रकार मनुष्य की महानता उसके कुल से नहीं बल्कि उसके अच्छे कर्म और श्रेष्ठ स्वभाव से होती है।

📖 कक्षा 7 हिंदी – 04. पाठ — पानी रे पानी

 

📘 पाठ — पानी रे पानी

लेखक — अनुपम मिश्र

📝 सरल सारांश

‘पानी रे पानी’ पाठ में लेखक अनुपम मिश्र ने पानी के महत्त्व, जल-संकट, बाढ़ और जल-संरक्षण की आवश्यकता को सरल ढंग से समझाया है। लेखक बताते हैं कि पानी हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है, लेकिन हम इसके संरक्षण के प्रति लापरवाह होते जा रहे हैं।

हमने विद्यालय में जल-चक्र के बारे में पढ़ा है—सूर्य की गर्मी से पानी भाप बनता है, बादल बनते हैं, वर्षा होती है और पानी नदियों के माध्यम से फिर समुद्र में पहुँच जाता है। लेकिन वास्तविक जीवन में पानी का संतुलन बिगड़ गया है। कई स्थानों पर नलों में पानी नहीं आता और जब आता है तो रात या बहुत सुबह जैसे असुविधाजनक समय पर आता है। गर्मी के दिनों में पानी की कमी के कारण लोगों को रात की नींद छोड़कर पानी भरना पड़ता है। पानी के लिए लोगों में झगड़े होने लगते हैं। कुछ लोग मोटर लगाकर दूसरों के हिस्से का पानी भी खींच लेते हैं, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। कई शहरों में पानी खरीदकर पीना पड़ता है और कुछ क्षेत्रों में अकाल जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।

इसके विपरीत, वर्षा ऋतु में बहुत अधिक पानी होने से बाढ़ आ जाती है। घरों, स्कूलों, सड़कों और रेल की पटरियों पर पानी भर जाता है तथा जनजीवन रुक जाता है। इसलिए लेखक कहते हैं कि अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। लेखक पानी बचाने को समझाने के लिए गुल्लक का उदाहरण देते हैं। जैसे हम थोड़े-थोड़े पैसे बचाकर गुल्लक भरते हैं, उसी प्रकार वर्षा के पानी को तालाबों, झीलों और अन्य जलस्रोतों में जमा करके धरती की ‘गुल्लक’ भरनी चाहिए। यह पानी धीरे-धीरे जमीन में जाकर भूजल भंडार को समृद्ध करता है।

लेकिन हमने लालच में तालाबों और जलस्रोतों को कचरे से भरकर उन पर मकान, बाजार, स्टेडियम आदि बना दिए। इससे पानी जमा करने की प्राकृतिक व्यवस्था नष्ट हो गई। परिणामस्वरूप गर्मी में नल सूखते हैं और बरसात में बस्तियाँ डूबने लगती हैं।

अंत में लेखक संदेश देते हैं कि हमें तालाबों, नदियों, झीलों और अन्य जलस्रोतों की रक्षा करनी चाहिए, वर्षा के पानी को रोकना चाहिए और भूजल को सुरक्षित रखना चाहिए। तभी हम पानी की कमी और बाढ़ जैसी समस्याओं से बच सकेंगे।

⭐ मुख्य सीख

  • जल जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • पानी की कमी और अधिकता—दोनों समस्याएँ गंभीर हैं।
  • अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
  • वर्षा के पानी को रोककर उसका संरक्षण करना चाहिए।
  • तालाब, झील और नदियाँ हमारे महत्वपूर्ण जलस्रोत हैं।
  • भूजल का संरक्षण आवश्यक है।
  • लालच में जलस्रोतों को नष्ट नहीं करना चाहिए।
  • जल बचाना अर्थात् भविष्य के जीवन को सुरक्षित करना।

🎯 परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु

बिंदुउत्तर
लेखकअनुपम मिश्र
मुख्य विषयजल का महत्त्व और जल-संरक्षण
जल-चक्रभाप → बादल → वर्षा → नदी → समुद्र
गर्मी की समस्याजल-संकट और अकाल जैसी स्थिति
बरसात की समस्याबाढ़ और जलभराव
दोनों को क्या कहा गया है?एक ही सिक्के के दो पहलू
गुल्लक किसका प्रतीक है?जल-संचय/जल-संरक्षण का
धरती को क्या कहा गया है?बहुत बड़ी गुल्लक
जलस्रोततालाब, झील, नदी आदि
भूजल कैसे बढ़ता है?तालाबों आदि में जमा पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसकर भूजल में मिलता है
जलस्रोत नष्ट करने का परिणामगर्मी में पानी की कमी और बरसात में बाढ़
समाधानवर्षा जल संचयन, जलस्रोतों की रक्षा और भूजल संरक्षण

📌 एक वाक्य में सार

‘पानी रे पानी’ पाठ हमें सिखाता है कि वर्षा के पानी को सँजोकर, तालाबों-झीलों और नदियों की रक्षा करके तथा भूजल को सुरक्षित रखकर ही हम जल-संकट और बाढ़ जैसी समस्याओं से बच सकते हैं।