प्रस्तुत पाठ सगुण भक्ति धारा की रामभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित दो प्रमुख रचनाओं 'कवितावली' और 'रामचरितमानस' के अंशों पर आधारित है
1. कवितावली (उत्तर कांड से):
इस अंश में तुलसीदास जी ने अपने समय की आर्थिक विषमता, भीषण बेकारी और भूख के यथार्थ का मार्मिक चित्रण किया है
पेट की आग का यथार्थ: तुलसीदास जी बताते हैं कि किसान, व्यापारी, भिखारी, नौकर, नट, चोर और बाजीगर सहित समाज का हर वर्ग केवल अपना पेट भरने के लिए ऊँचे-नीचे कर्म और धर्म-अधर्म कर रहा है
। लोग पेट की आग बुझाने के लिए अपनी संतानों (बेटा-बेटी) तक को बेचने के लिए विवश हैं । यह पेट की आग समुद्र की बड़वाग्नि से भी बड़ी है, जिसे केवल 'राम-रूपी घनश्याम' (ईश्वर कृपा) ही बुझा सकते हैं । बेकारी और दरिद्रता का दशानन: समाज में अकाल और बेकारी की यह स्थिति है कि किसानों के पास खेती नहीं है, भिखारियों को भीख नहीं मिल रही, व्यापारियों का व्यापार ठप्प है और नौकरों के पास कोई काम नहीं है
। यह दरिद्रता रूपी रावण (दशानन) पूरी दुनिया को दबा रहा है, जिससे मुक्ति के लिए तुलसी राम से गुहार लगाते हैं । भक्त का स्वाभिमान और निर्भयता: तुलसीदास जी समाज के जाति-पाँत और धर्म के भेदभाव को नकारते हुए पूरे आत्मविश्वास से कहते हैं कि वे राम के गुलाम हैं, उन्हें समाज के निंदा-प्रशंसा या जाति-बिगाड़ की कोई परवाह नहीं है, क्योंकि उन्हें किसी से बेटी ब्याहकर रिश्ता नहीं जोड़ना है
।
2. लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप (रामचरितमानस - लंका कांड):
यह प्रसंग लंका युद्ध के दौरान लक्ष्मण को शक्ति बाण लगने के बाद का है
राम का मानवीय विलाप: जब आधी रात बीतने पर भी संजीवनी बूटी लेकर हनुमान नहीं लौटते, तो राम एक साधारण मनुष्य की तरह विलाप करने लगते हैं
। वे अपने भाई के निस्वार्थ प्रेम, माता-पिता को छोड़ने और जंगल के कष्ट सहने को याद कर भावुक हो उठते हैं । भाई का महत्व: राम कहते हैं कि दुनिया में धन, संपत्ति, स्त्री और परिवार तो बार-बार मिल सकते हैं, लेकिन लक्ष्मण जैसा सहोदर भाई दोबारा नहीं मिल सकता
। वे यहाँ तक कहते हैं कि भाई को खोकर वे अयोध्या क्या मुँह लेकर जाएँगे; दुनिया में स्त्री (नारी) को खोने का अपयश तो वे सह लेते, लेकिन भाई को खोना उनके लिए असहनीय है । वीर रस का उदय: राम के इस घने शोक (करुण रस) के बीच अचानक हनुमान जी संजीवनी लेकर आ जाते हैं, जिसे तुलसीदास जी ने ऐसा बताया है मानो करुण रस के बीच 'वीर रस' का उदय हो गया हो
। कुंभकर्ण का जागरण: दूसरी ओर, जब रावण को लक्ष्मण के ठीक होने और अपने बड़े-बड़े योद्धाओं के मारे जाने का पता चलता है, तो वह परेशान होकर कुंभकर्ण को जगाता है
। कुंभकर्ण जागकर रावण को फटकारता है कि साक्षात जगदंबा (सीता) का हरण करके वह अपना कल्याण कैसे सोच सकता है ।
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