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सोमवार, 21 सितंबर 2026

कक्षा -12 ,बादल राग - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

पाठ -7, बादल राग - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' 


सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित 'बादल राग' कविता में बादलों को क्रांति, नव-निर्माण और सामाजिक बदलाव के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है
। इस कविता का सार निम्नलिखित है:

  • क्रांति और सृजन का प्रतीक: कवि ने बादल का आह्वान क्रांति के रूप में किया है, क्योंकि बादलों के भीतर निर्माण (सृजन) और विनाश (ध्वंस) दोनों की ताकत एक साथ मौजूद होती है

  • वंचितों और शोषितों में उल्लास: बादलों की भयंकर गर्जना और मूसलाधार बारिश से छोटे पौधे खुशी से हिलने-डुलने लगते हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि क्रांति से आम आदमी (लघुमानव) और वंचित वर्ग को हमेशा लाभ होता है। धरती के भीतर सोए हुए बीज भी नवजीवन की आशा में सिर उठाकर बादलों की ओर ताकते हैं

  • पूँजीपतियों और शोषकों में भय: बादलों के कठोर वज्रपात से आसमान छूने की चाह रखने वाले वीर (विशाल पेड़) घायल होकर गिर जाते हैं, जो समाज के शक्तिशाली और अहंकारी वर्ग का प्रतीक हैं। ऊँची अट्टालिकाओं (भवनों) में रहने वाले धनी लोग क्रांति की इस गर्जना से डरकर काँपते हैं और भयभीत होकर अपना मुँह छिपाते हैं

  • किसान की पुकार: शोषण के कारण किसान का सारा जीवन-रस सूख गया है और उसका शरीर जीर्ण-शीर्ण होकर केवल हड्डियों का ढाँचा मात्र रह गया है। दुख से त्रस्त और व्याकुल किसान नव-निर्माण के लिए अधीर होकर क्रांति के वीर (बादल) को पुकार रहा है

यह कविता स्पष्ट करती है कि विप्लव (क्रांति) हमेशा वंचितों का पक्ष लेती है और इस विनाशकारी बदलाव से हमेशा छोटे और शोषित लोगों को ही नया जीवन और शोभा प्राप्त होती है

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