📖 परीक्षा — सारांश
‘परीक्षा’ कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं। कहानी में यह बताया गया है कि किसी व्यक्ति की योग्यता केवल उसकी शिक्षा या दिखावे से नहीं, बल्कि उसके आचरण, दया, साहस और कर्तव्यनिष्ठा से पहचानी जानी चाहिए।देवगढ़ रियासत के दीवान सरदार सुजानसिंह वृद्ध हो चुके थे। उन्हें लगा कि अब वे राज-काज ठीक से नहीं सँभाल पाएँगे। इसलिए उन्होंने राजा से अपने पद से हटने की अनुमति माँगी। राजा ने उनकी बात मान ली, लेकिन नए दीवान को चुनने की जिम्मेदारी भी सुजानसिंह को ही दी। उन्होंने ऐसा उम्मीदवार चुनने का निर्णय लिया जो विद्या से अधिक अपने व्यवहार और कर्तव्य में योग्य हो।
दीवान पद के लिए बहुत से उम्मीदवार देवगढ़ आए। सभी लोग अपने अच्छे व्यवहार का दिखावा करने लगे। कोई सुबह जल्दी उठने लगा, तो कोई नौकरों से बहुत नम्रता से बात करने लगा। लेकिन सुजानसिंह इन दिखावटी व्यवहारों के पीछे छिपे वास्तविक स्वभाव को परख रहे थे।एक दिन उम्मीदवारों ने हॉकी खेली। खेल समाप्त होने के बाद उन्हें रास्ते में एक किसान की अनाज से भरी बैलगाड़ी नाले में फँसी दिखाई दी। किसान बहुत परेशान था और सहायता की आवश्यकता थी। सभी खिलाड़ियों ने उसे देखा, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की।
उसी समूह में पंडित जानकीनाथ नामक एक युवक था। हॉकी खेलते समय उसके पैर में चोट लगी थी, फिर भी उसने किसान की परेशानी देखकर उसकी सहायता करने का निर्णय लिया। उसने अपने कपड़े उतारकर पूरी शक्ति से गाड़ी को धक्का दिया। वह घुटनों तक कीचड़ में धँस गया, लेकिन उसने हार नहीं मानी और अंततः बैलगाड़ी को नाले से बाहर निकाल दिया।किसान ने प्रसन्न होकर कहा कि यदि नारायण चाहेंगे तो दीवानी का पद जानकीनाथ को ही मिलेगा। वास्तव में वह किसान के वेश में स्वयं सरदार सुजानसिंह थे और उन्होंने जानकीनाथ की परीक्षा ले ली थी।
एक महीने की परीक्षा के बाद सुजानसिंह ने पंडित जानकीनाथ को देवगढ़ का नया दीवान चुना। उन्होंने कहा कि जानकीनाथ के हृदय में दया, उदारता, साहस और आत्मबल है। ऐसा व्यक्ति गरीबों पर अत्याचार नहीं करेगा और दया तथा धर्म के मार्ग से नहीं हटेगा।
⭐ मुख्य संदेश
मनुष्य की असली योग्यता उसकी डिग्री या दिखावे में नहीं, बल्कि उसके अच्छे आचरण, दया, साहस, उदारता और कर्तव्यनिष्ठा में होती है।
📌 परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु
- लेखक: मुंशी प्रेमचंद
- मुख्य पात्र: सरदार सुजानसिंह, पंडित जानकीनाथ
- स्थान: देवगढ़ रियासत
- पद: दीवान
- परीक्षा का आधार: आचार-विचार और कर्तव्यनिष्ठा
- जानकीनाथ की विशेषताएँ: दयालु, साहसी, उदार और आत्मबल से युक्त
- कहानी का संदेश: दिखावे से अधिक महत्त्व अच्छे चरित्र और व्यवहार का है।
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