यहाँ पर आप कक्षा VI से X तक की PPT, lesson plan, परीक्षा प्रश्न पत्र आदि डाउनलोड करके आप उनमें अपने अनुसार आवश्यक बदलाव कर सकते हैं|

शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

📖 कक्षा 6 हिंदी –09. मैया मैं नहिं माखन खायो

 

 मैया मैं नहिं माखन खायो — सारांश

‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ कविता सूरदास द्वारा रचित है। इसमें श्रीकृष्ण की बाल-लीला, उनकी चतुराई और माता यशोदा के प्रति उनके प्रेम का सुंदर वर्णन किया गया है। श्रीकृष्ण पर माखन खाने का आरोप लगता है। वे अपनी माता यशोदा से कहते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया। वे सफाई देते हुए कहते हैं कि सुबह होते ही माता उन्हें गायों के पीछे मधुबन भेज देती हैं। वे दिनभर वन में घूमते हैं और शाम को घर लौटते हैं। फिर वे कहते हैं कि वे अभी छोटे बालक हैं और उनके छोटे-छोटे हाथ हैं, इसलिए वे छीके पर रखा माखन कैसे प्राप्त कर सकते हैं।

कृष्ण आगे कहते हैं कि सभी ग्वाल-बाल उनसे बैर रखते हैं और उन्होंने जबरदस्ती उनके मुँह पर माखन लगा दिया है। वे अपनी माता को भोली बताते हुए कहते हैं कि वह ग्वाल-बालों की बातों पर विश्वास कर लेती हैं और उन्हें अपना पराया समझकर उन पर संदेह करती हैं।

अंत में कृष्ण अपनी लाठी और कंबल माता को देते हुए कहते हैं कि उन्होंने उन्हें बहुत नचा दिया है। कृष्ण की प्यारी और भोली बातें सुनकर यशोदा हँस पड़ती हैं और उन्हें अपने हृदय से लगा लेती हैं।

⭐ मुख्य भाव

इस कविता में बालकृष्ण की भोली शरारत, चतुराई और मनमोहक बाल-स्वभाव का चित्रण हुआ है। कृष्ण माखन खाने की बात से इनकार करते हुए ऐसी बातें कहते हैं कि माता यशोदा भी उनकी बातों पर मुस्कुराए बिना नहीं रह पातीं।

📌 परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु

  • कवि: सूरदास
  • भाषा: ब्रजभाषा
  • मुख्य पात्र: श्रीकृष्ण और माता यशोदा
  • मुख्य विषय: कृष्ण की बाल-लीला और माखन चोरी
  • कृष्ण का तर्क: वे छोटे हैं और उनके हाथ छीके तक नहीं पहुँच सकते।
  • ग्वाल-बालों पर आरोप: उन्होंने जबरदस्ती कृष्ण के मुँह पर माखन लगा दिया।
  • यशोदा की प्रतिक्रिया: कृष्ण की बातों पर हँसकर उन्हें गले लगा लिया।
  • मुख्य भाव: वात्सल्य, बाल-चंचलता और हास्य। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें