यहाँ पर आप कक्षा VI से X तक की PPT, lesson plan, परीक्षा प्रश्न पत्र आदि डाउनलोड करके आप उनमें अपने अनुसार आवश्यक बदलाव कर सकते हैं|

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

9.कबीरदास

प्रस्तुत पाठ भक्तिकाल की निर्गुण धारा के प्रमुख संत कवि कबीरदास जी के एक पद पर आधारित है। इस पद में उन्होंने ईश्वर के अद्वैत (एक होने) स्वरूप को स्पष्ट करते हुए कण-कण में उसकी व्याप्ति को दर्शाया है। 

  • ईश्वर एक है: कबीर कहते हैं कि उन्होंने जान लिया है कि ईश्वर एक ही है। जो लोग अज्ञानतावश ईश्वर को दो या अलग-अलग मानते हैं, उन्होंने परम सत्य को नहीं पहचाना है और वे नरक (दोजग) के भागी हैं।

  • प्रकृति और कुम्हार का उदाहरण: कबीर तर्क देते हैं कि पूरे संसार में एक ही हवा बहती है, एक ही पानी है और एक ही ज्योति (प्रकाश) सबमें समाई हुई है। जिस तरह एक ही कुम्हार एक ही मिट्टी (खाक) को सानकर अलग-अलग आकार के बर्तन बनाता है, उसी तरह एक ही ईश्वर ने सभी मनुष्यों की रचना की है।

  • आत्मा की अमरता: जिस प्रकार बढ़ई लकड़ी को तो काट सकता है, परंतु लकड़ी के अंदर निहित आग को नहीं काट सकता, उसी प्रकार शरीर नष्ट हो सकता है लेकिन उसके भीतर रहने वाली आत्मा (ईश्वर का अंश) अमर है और वह हर हृदय (घट) में व्याप्त है।

  • माया और अहंकार का त्याग: कबीर संसार के लोगों को चेतावनी देते हैं कि यह दुनिया माया के झूठे रूप को देखकर उस पर लुभा जाती है। मनुष्य को इस माया और धन-दौलत पर व्यर्थ का घमंड नहीं करना चाहिए।

  • निर्भयता: अंत में कबीर स्वयं को प्रभु-प्रेम में 'दीवाना' बताते हुए कहते हैं कि जो व्यक्ति मोह-माया और अहंकार से मुक्त होकर निर्भय हो जाता है, उसे दुनिया का कोई कष्ट या डर नहीं सताता।


1.📥Click here for the quiz

2.📥 Click here to download the PPT

3.📥 Click here to download the PDF

4.📥 Click here to download Competency-Based Questions

5.🧠 Click here to download the Mind Map

6.📚 Click here to download Difficult Words

7.📝 Click here to download the Worksheet

8.📘 Click here to download the Lesson Plan

9.📖 Click here to download Passage-Based Questions

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें