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गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026

कक्षा 8, पाठ 7.मत बाँधो'

सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा द्वारा रचित कविता 'मत बाँधो' सपनों की स्वतंत्रता, उनकी असीमित संभावनाओं और मानव जीवन में उनके महत्व को दर्शाती है。 इस कविता का सार निम्नलिखित है:

  • सपनों की स्वतंत्रता: कवयित्री आग्रह करती हैं कि इन सपनों के पंख मत काटो और इनकी गति को मत बाँधो (अर्थात कल्पनाओं और विचारों पर नियंत्रण या पाबंदी मत लगाओ)। सपनों को पूरी स्वतंत्रता से उड़ान भरने का अधिकार होना चाहिए。

  • सपनों की प्रकृति (सुगंध, बीज और अग्नि से भिन्न): कवयित्री बताती हैं कि सपने फूल की सुगंध (सौरभ), धूल में गिरे बीज या धरती पर जलने वाली अग्नि (जिसका केवल धुआँ आकाश में उड़ता है) से अलग हैं। सुगंध, बीज या धुआँ केवल एक ही दिशा में जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं, लेकिन सपनों में दोहरी गति (आरोहण और अवरोहण) होती है।

  • आरोहण और अवरोहण: सपने पहले एक विचार के रूप में ऊँचाइयों (आकाश) तक उड़ान भरते हैं (आरोहण), और फिर साकार होकर वास्तविकता (आँखों) में वापस लौट आते हैं (अवरोहण)।

  • सृजन और सौंदर्य: सपने मुक्त आकाश में तारों, बादलों (मेघों) के रंगों और सूर्य की किरणों की चमक (दीप्ति) के साथ मिलकर धरती पर वापस आते हैं।

  • स्वर्ग बनाने का शिल्प: ये स्वतंत्र और रचनात्मक सपने धरती को एक ऐसा सुंदर और सुखद स्थान (स्वर्ग) बनाने का शिल्प (कारीगरी या हुनर) सिखाते हैं, जहाँ परस्पर सहयोग, शांति और सद्भाव हो।

अंत में, कवयित्री पुनः आह्वान करती हैं कि इन रचनात्मक सपनों को आकाश तक जाने से मत रोको और इन्हें धरती के बंधनों में मत जकड़ो। स्वतंत्र विचार और सपने ही समाज को सुंदर और समृद्ध बनाते हैं।


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