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गुरुवार, 10 सितंबर 2026

6.रजनी

 

मन्नू भंडारी द्वारा लिखित 'रजनी' नब्बे के दशक के एक प्रसिद्ध टीवी धारावाहिक की पटकथा का अंश है। यह पाठ शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे ट्यूशन के व्यापार और शिक्षकों की धांधली के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली एक साहसी और जुझारू महिला की कहानी है। 

अमित का रिज़ल्ट: रजनी अपनी पड़ोसन लीला बेन के घर जाती है, जहाँ उनका बेटा अमित अपना परीक्षा परिणाम लेकर आता है। अमित पढ़ाई में बहुत होशियार है, फिर भी उसे मैथ्स (गणित) में 72 नंबर मिलते हैं। वह रोते हुए बताता है कि सारा पेपर ठीक करने के बावजूद उसके मैथ्स के टीचर, मिस्टर पाठक ने उसके नंबर काट लिए क्योंकि उसने उनके बार-बार कहने के बावजूद उनसे ट्यूशन नहीं ली थी।

  • अन्याय के खिलाफ रजनी का संघर्ष: अमित की माँ लीला बेन डर के कारण चुप रहना बेहतर समझती है, लेकिन रजनी इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करती। वह अमित के स्कूल के हैडमास्टर के पास जाकर उसकी कॉपी देखने की मांग करती है, लेकिन हैडमास्टर 'नियम' का बहाना बनाकर कॉपी दिखाने से मना कर देता है और ट्यूशन को टीचर और स्टूडेंट का निजी मामला बताकर अपना पल्ला झाड़ लेता है।

  • निदेशक से मुलाकात: हैडमास्टर से निराश होकर रजनी डायरेक्टर ऑफ़ एजुकेशन (शिक्षा निदेशक) से मिलने जाती है। लेकिन निदेशक भी इस समस्या को गंभीरता से नहीं लेता और कहता है कि कमज़ोर बच्चे ट्यूशन लेते हैं और उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है।

  • आंदोलन और प्रेस का सहयोग: रजनी हार नहीं मानती। वह एक अखबार के संपादक से मिलती है और इस मुद्दे को उठाने का आग्रह करती है। संपादक उसका पूरा साथ देते हैं और एक अच्छा 'राइट-अप' छापकर लोगों को जागरूक करते हैं।

  • पेरेंट्स मीटिंग और नियम बदलना: रजनी 25 तारीख को पेरेंट्स की एक बड़ी मीटिंग आयोजित करती है, जिसमें भारी संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं। वह मंच से प्रस्ताव रखती है कि कोई भी टीचर अपने ही स्कूल के छात्रों का ट्यूशन नहीं करेगा और इस नियम को तोड़ने वाले टीचर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

  • सफलता: कुछ समय बाद, शिक्षा बोर्ड रजनी के प्रस्ताव को ज्यों-का-त्यों स्वीकार कर लेता है और इसे नियम बना देता है। इस जीत से रजनी और उसके समर्थक बेहद खुश होते हैं, और रजनी का पति भी उस पर गर्व महसूस करता है।

यह कहानी संदेश देती है कि अन्याय सहने वाला भी अन्याय करने वाले जितना ही गुनहगार होता है, और यदि डटकर मुकाबला किया जाए तो किसी भी धांधली और बेइंसाफी को रोका जा सकता है।


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