घर की याद — सारांश
‘घर की याद’ कविता के रचयिता भवानीप्रसाद मिश्र हैं। इस कविता में कवि ने जेल में रहते हुए वर्षा के वातावरण में अपने घर, माता-पिता, भाई-बहनों और परिवार के प्रति अपने गहरे प्रेम तथा वियोग की पीड़ा को व्यक्त किया है।
कवि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के कारण जेल में बंद है। एक दिन लगातार हो रही वर्षा को देखकर उसे अपने घर की बहुत याद आती है। वर्षा के कारण चारों ओर अँधेरा और शांति छाई हुई है। पानी की झर-झर, पत्तों की हर-हर और हवा की सर-सर की आवाजें कवि के मन में घर की याद को और गहरा कर देती हैं।
कवि को अपने घर में रहने वाले चार भाइयों और चार बहनों की याद आती है। उसे विशेष रूप से अपनी अनपढ़ और ममतामयी माँ की याद आती है। वह सोचता है कि माँ उसकी याद में दुखी होगी और यदि वह उसे पत्र लिखना चाहती भी होगी, तो लिख नहीं पाएगी।
कवि अपने पिताजी को भी याद करता है। वह उन्हें मजबूत शरीर और कोमल हृदय वाला, साहसी, कर्मठ और उत्साही व्यक्ति मानता है। कवि कल्पना करता है कि पिताजी उसके जेल जाने के कारण भावुक होकर रो रहे होंगे। माँ उन्हें समझाती होगी कि भवानी देश के लिए अपने कर्तव्य का पालन करने जेल गया है और उन्हें दुखी नहीं होना चाहिए।
कवि को अपने बचपन की वे बातें भी याद आती हैं जब उसे वर्षा बहुत पसंद थी। वह बारिश में नंगे सिर घूमता, बाड़े में लौकी के बीज लगाता और अपने परिवार के सदस्यों को उनके बारे में बताता था। इन स्मृतियों के कारण उसकी वियोग-वेदना और बढ़ जाती है।
कवि सावन को अपना संदेशवाहक बनाकर पिताजी के पास भेजना चाहता है। वह सावन से कहता है कि पिताजी को यह बताना कि वह जेल में खुश है, पढ़ता-लिखता है, काम करता है और चरखा कातता है। वह सावन को विशेष रूप से मना करता है कि उसकी वास्तविक पीड़ा के बारे में कुछ न बताना, क्योंकि इससे पिताजी और अधिक दुखी हो जाएँगे।
अंत में वर्षा रुक जाती है, लेकिन कवि का मन और अधिक भावुक हो जाता है। उसे अनुभव होता है कि परिवार से दूर रहने का दुख बहुत गहरा है। कविता में परिवार के प्रति प्रेम, माता-पिता के प्रति स्नेह, वियोग-वेदना और देश के प्रति कर्तव्य की भावनाएँ अत्यंत मार्मिक रूप में व्यक्त हुई हैं।
मुख्य भाव:
यह कविता बताती है कि देश के लिए जेल जाने वाला व्यक्ति भी अपने परिवार से गहरे प्रेम और भावनात्मक संबंध रखता है। परिवार से दूर रहने की पीड़ा के बावजूद कवि अपने देश-प्रेम और कर्तव्य से पीछे नहीं हटता।
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