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शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

📖 कक्षा 6 हिंदी – 02. गोल

 

📘 पाठ – गोल

लेखक – मेजर ध्यानचंद

📝 पाठ का सरल सारांश

‘गोल’ पाठ महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के संस्मरण का एक अंश है। इसमें उनके हॉकी जीवन, खेल-कौशल, संघर्ष और खेल भावना का वर्णन किया गया है।

सन् 1933 में पंजाब रेजिमेंट और सैंपर्स एंड माइनर्स टीम के बीच हॉकी मैच के दौरान एक खिलाड़ी ने गुस्से में मेजर ध्यानचंद के सिर पर हॉकी स्टिक मार दी। चोट लगने के बाद वे पट्टी बाँधकर दोबारा मैदान में आए। उन्होंने उस खिलाड़ी से कहा कि वे उसका बदला जरूर लेंगे। खिलाड़ी डर गया, लेकिन ध्यानचंद ने उससे मारपीट करने के बजाय लगातार छह गोल करके अपना बदला लिया। मैच के बाद उन्होंने उसे समझाया कि खेल में इतना गुस्सा करना ठीक नहीं है।मेजर ध्यानचंद के अनुसार सफलता का कोई जादुई मंत्र नहीं होता। लगन, साधना और खेल भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं।

उनका जन्म 1904 में प्रयाग के एक साधारण परिवार में हुआ। 16 वर्ष की उम्र में वे फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट में साधारण सिपाही के रूप में भर्ती हुए। शुरू में उन्हें हॉकी में कोई विशेष रुचि नहीं थी, लेकिन सूबेदार मेजर तिवारी के प्रोत्साहन से उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया। अभ्यास और मेहनत से उनके खेल में लगातार निखार आता गया।

सन् 1936 के बर्लिन ओलंपिक में उन्हें भारतीय हॉकी टीम का कप्तान बनाया गया। उनके शानदार खेल से प्रभावित होकर लोग उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहने लगे। वे स्वयं गोल करने के बजाय कई बार गेंद अपने साथी खिलाड़ी को देते थे, ताकि गोल करने का श्रेय उसे मिल सके। उनकी इसी खेल भावना और निस्वार्थ व्यवहार ने उन्हें दुनिया के खेल प्रेमियों का प्रिय बना दिया। बर्लिन ओलंपिक में भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक जीता।

⭐ पाठ से मिलने वाली सीख

  • सफलता के लिए लगन और कठिन परिश्रम आवश्यक है।
  • खेल में खेल भावना बनाए रखनी चाहिए।
  • क्रोध का उत्तर क्रोध से नहीं, बल्कि श्रेष्ठ प्रदर्शन से देना चाहिए।
  • अपनी सफलता का श्रेय दूसरों के साथ बाँटना चाहिए।
  • हार-जीत केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे देश की प्रतिष्ठा से जुड़ी होती है।
  • मेजर ध्यानचंद महान खिलाड़ी होने के साथ-साथ विनम्र, निस्वार्थ और आदर्श खिलाड़ी थे।

🎯 परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु

प्रश्नउत्तर
पाठ का नाम                                              गोल
लेखकमेजर ध्यानचंद
खेलहॉकी
जन्म1904, प्रयाग
रेजिमेंटफर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट
प्रसिद्ध उपनामहॉकी का जादूगर
कप्तान कब बने?1936 के बर्लिन ओलंपिक में
सफलता के मंत्रलगन, साधना और खेल भावना
बर्लिन ओलंपिक में पदकस्वर्ण पदक
पाठ की मुख्य भावनाखेल भावना, परिश्रम, अनुशासन और देशप्रेम

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