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शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

📖 कक्षा 6 हिंदी –07.जलाते चलो

 

🌟 जलाते चलो — सारांश

कवि – द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

इस कविता में कवि ने दीपक को आशा, प्रेम, ज्ञान और मानवता का प्रतीक माना है। कवि लोगों से कहते हैं कि वे प्रेम और स्नेह से भरे दीपक जलाते रहें, ताकि संसार से अज्ञान, बुराई और दुख का अँधेरा दूर हो सके।कवि के अनुसार आज विज्ञान और शक्ति के होते हुए भी संसार में अँधकार बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसलिए केवल बिना स्नेह के जलने वाले विद्युत-दीपों से रास्ता नहीं मिलेगा। मनुष्य को प्रेम, सहयोग और मानवता की भावना से आगे बढ़ना होगा।

कवि उन लोगों को याद करते हैं जिन्होंने सबसे पहले अँधेरे को चुनौती दी और दीपक जलाकर अज्ञान के अँधेरे को दूर करने का प्रयास किया। समय और परिस्थितियों के तूफानों ने अनेक दीप बुझाए, लेकिन उन दीपों से मिली ज्योति आगे भी अँधकार को प्रकाश देती रहेगी।

कवि का विश्वास है कि यदि धरती पर एक भी दीप जलता रहेगा, तो अँधेरी रात के बाद एक दिन अवश्य सवेरा होगा। इसलिए हमें कठिनाइयों से हार न मानकर आशा, ज्ञान, प्रेम और मानवता का प्रकाश फैलाते रहना चाहिए।

💡 कविता का मुख्य संदेश

  • अँधेरे पर प्रकाश की विजय निश्चित है।
  • दीपक = आशा, ज्ञान, प्रेम और मानवता का प्रतीक है।
  • कठिनाइयों के बावजूद अच्छे कार्य करते रहना चाहिए।
  • प्रेम और स्नेह के बिना केवल विज्ञान और शक्ति से संसार का कल्याण नहीं हो सकता।
  • मिल-जुलकर मानवता और सद्भावना का प्रकाश फैलाना चाहिए।
  • एक छोटी-सी सकारात्मक कोशिश भी बड़े परिवर्तन का कारण बन सकती है।

📌 परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु

  1. कवि: द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
  2. मुख्य प्रतीक: दीपक और अँधेरा
  3. दीपक का प्रतीक: आशा, ज्ञान, प्रेम और मानवता
  4. अँधेरे का प्रतीक: अज्ञान, बुराई और निराशा
  5. कवि का आह्वान: स्नेह से दीप जलाते हुए प्रकाश फैलाते रहना।
  6. केंद्रीय भाव: निरंतर प्रयास और सकारात्मकता से अँधकार को दूर किया जा सकता है। 

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